Saturday, March 7, 2009

बीस साल बाद

कोई भी इंसान दीर्घायु की कामना ना करे ऐसा तो नामुमकिन है ।
पर उस आयु को आमरण जिए, ये ज़रूरी नही ।
आज से बीस साल पहले को ही लीजिये, मुझे याद नही की मैंने कक्षा में कितनी बार अद्यापक की बात सुनी या समझी । पर बहुत सी बातें ऐसीं हैं जो भुलाये नही भूलती।

कुछ ऐसी ही जिंदगी की झलकियाँ जो शायद सर्वव्यापी रही हों ...
अपने हाथों में कांग्रेस का झंडा लेकर वी पी सिंह हाय हाय के नारे लगते हुए सडकों पर घूमना
२ दूरदर्शन पर चित्रहार और रामायण के इंतज़ार में पूरा हफ्ता गुजारना
३ रसना और गोल्ड स्पॉट पीना अपने आप में एक त्यौहार जैसा होना
४ मम्मी के हाथ के बुने हुए स्वेटर पहन कर बर्फ में घूमना
५ रात से नफरत करना क्यूंकि शाम के खेल में रात का खलल खटकना
६ ये सोचना के लड़कियों को स्तापू खेलने से क्या मिलता है
७ सोमवार रात को बिनाका गीतमाला सुनकर चहकना
८ हैरान होना की सबके पास हो अगर एक मेंडक जैसी गाड़ी तो कितना सही हो
९ कूलर में पानी भरना दिन में दो बार नहाने जैसा मस्ती भरा काम होना
१० सकूल में ठंडा तिफ्फिन का खाना घर के आम खाने से कहीं बेहतर लगना

और अगर मैं आज से बीस साल बाद की कल्पना करू तो शायद कुछ ऐसे वाक्य मुझे याद रहे

१ वो कोने वाला ऑफिस का कमरा
२ घर में दो होम थिएटर होने पर भी दिल का न बेहेलना
३ दोस्त तो सिर्फ़ नाम के , सब अपने में उलझे हुए
४ बर्फ में जाना तो दूर, एसी का तेज़ होना जुकाम को निमंत्रण
५ खाने से ज्यादा कैप्सूल का लेना ज़रूरी
६ डाइट पेप्सी तो दूर अब तो डाइट पानी लेना पड़ता है जनाब
७ मेंडक वाली गाड़ी तो दूर अब तो लिमो से बोर हो गए हैं
८ गाने हैं की उफ़ हाय मेरी तौबा एक ही शब्द पर शोर मचाते रहते हैं। सुरूर और न जाने क्या क्या
९ शाम तो कभी देखी ही नही, आफिस में ही सुबह और रात का उजागर होना देखा है
१० सोचते हैं की अगर कभी चाट के मज्जे गलियों में लेने को मिलते तो क्या बात थी, अब तो सब कुछ मिक्रो में बनता है जो शायद दिल्ली के बड़े मियां कभी चख लेते तो वहीं शर्म से प्राण पखेरू त्याग देते

शायद ये सब कुछ न हो , शायद ज़िन्दगी कहीं बेहतर गुज़रे।
तो क्यूँ न हम प्रयास 'ना' करें इससे बदलने का , जैसे हमने बीस साल पहले भी नही किया ।
क्यूँ न हम इस शायद को मिटा दें ,
मुमकिन है इस ज़िन्दगी के लम्हे थोड़े और रूमानी हो जायें।

7 comments:

संगीता पुरी said...

बहुत सुंदर…..आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्‍लाग जगत में स्‍वागत है…..आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्‍दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्‍दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्‍त करेंगे …..हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।

mastkalandr said...

Aisa lagta hai jaise aapne mere dil ki baat likhdi hai..bahut khuub
Aam aadmi ke sath kuchh kuchh aisa hi hota hai..,anubhav mazedar hai..
Daag sahab ne kaha hai..
aay kya duniya mei ham,kya sair ki
chalte-firte ek nazara ho gya
abhinandan.. mk

ज्योत्स्ना पाण्डेय said...

ब्लॉग जगत में आपका स्वागत है, आपके लेखन के लिए हार्दिक शुभकामनाएं .......
होली पर्व की बधाई .........

रचना गौड़ ’भारती’ said...

ब्लोगिंग जगत मे स्वागत है
बधाई
कविता,गज़ल और शेर के लि‌ए मेरे ब्लोग पर स्वागत है ।
मेरे द्वारा संपादित पत्रिका देखें
www.zindagilive08.blogspot.com
आर्ट के लि‌ए देखें
www.chitrasansar.blogspot.com

गोविंद गोयल, श्रीगंगानगर said...

narayan narayan

$JD$ said...
This comment has been removed by the author.
$JD$ said...

Dr sahab, ye kuch aisi baatien hai jo hamesha mere zehen mei aati rahi, par hamesha ki tarah mai kabhi apni soch ko articulate nai kar paya...I could see another similarity in our thoughts...wonderful!!!